कुर्सियां
ऊंची कुर्सियां,
घूमनेवाली कुर्सियां
बता रही हैं नाम
पदनाम कुर्सियां
जितनी ऊंची कुर्सी
जिसकी
ओहदा उनता शानदार
ऊंची कुर्सियां,
घूमनेवाली कुर्सियां......
छोटे लोग, छोटी
कुर्सी
बड़े लोग, बड़ी कुर्सी
ऊंचे लोग ऊंची
कुर्सी
सड़े लोग, सड़ी कुर्सी
फटेहालों के लिए
फटेहाल कुर्सियां
ऊंची कुर्सियां,
घूमनेवाली कुर्सियां.....
मोल- भाव कर रहे हैं
लोग
देख रंग, रूप, नक़्श
कुर्सी का
छोटी कुर्सी, छोटा
दाम
बड़ी कुर्सी, बड़ा दाम
जैसा ग्राहक वैसी
पूड़ियां
बांध रही ये बाजारू
कुर्सियां
ऊंची कुर्सियां,
घूमनेवाली कुर्सियां.....
बड़े अफसर झूल रहे
कुर्सी पर
नेता लोट रहे कुर्सी
पर
मंत्री सो रहे
कुर्सी पर
पीढ़ी दर पीढ़ी बपौती
बनी कुर्सियां
केबिनों की शान बढ़ा
रही
ये वजनदार कुर्सियां
ऊंची कुर्सियां,
घूमनेवाली कुर्सियां.....
जन्म जन्मांतर को
सार्थक कर रही कुर्सी
त्रिवेणी पार करा
रही कुर्सी
धर्मस्थलों से फतवा
जारी कर रही कुर्सी
समाज में दहशत फैला
रही कुर्सी
इंसानी चेहरों के
नकाब दिखा रही
ये मज़हबी कुर्सियां
ऊंची कुर्सियां,
घूमनेवाली कुर्सियां.....
बीच बाज़ार बिक रही
कुर्सी
जुल्मों का सैलाब ढ़ा
रही कुर्सी
कुर्सियां कुर्सियों
से टकरा रही हैं
मस्तानी शाम के वक्त
चीयर्स करते प्याले
टकराते
जाम जैसी पिए जा रही
कुर्सियां
ऊंची कुर्सियां,
घूमनेवाली कुर्सियां.....
बेवक्त जागती कुर्सी
वक्त पर सो जाती
कुर्सी
न्याय की जगह अन्याय
अन्याय की जगह न्याय
करती कुर्सी
फरेबों की दुहाई
देती कुर्सी
आँखों पर पट्टी
बांधे
इंसाफ करती कुर्सियां
ऊंची कुर्सियां, घूमनेवाली
कुर्सियां.....
अनगिनत
भ्रष्ट इन कुर्सियों के बीच
सच
की जंग लड़ रही कुर्सी
अपने
हक के लिए जूझ रही कुर्सी
दया- रहम की भीख मांग रही कुर्सी
डंके की चोट पर टकरायी हैं
ईमानदार, शालीन, वफादार कुर्सियां
ऊंची कुर्सियां, घूमनेवाली
कुर्सियां.....
अपनी इज्जत अपनी शान
देश की आन पर शहीद
हो रही कुर्सी
कुछ टूट गई, कुछ तोड़
दी गई
अपनी ज़ज़्बात पर
अड़ी
कुछ खुद्दार
कुर्सियां
ऊंची कुर्सियां,
घूमनेवाली कुर्सियां.....
सरफरोशी के गीत गा
रही कुर्सी
सीमा पर जान
न्योछावर कर रही कुर्सी
जयहिंद – वंदेमातरम
गा रही कुर्सी
बदलते वक्त के तेज
अंधड़ में
लाचार, मज़बूर,
शिकस्त खायी
चापलूसी में मस्त
कुर्सी
कुछ घायल्, कुछ
लहूलुहान होकर भी
मिसाल अपनी छोड़ गयी
स्वाभिमानी
कुर्सियां
ऊंची कुर्सियां,
घूमनेवाली कुर्सियां.....
रंगदार कुर्सियां
ढंगदार कुर्सियां
आसीन हैं
घरों में, दफ़्तरों
में
विद्यालयों में,
मंत्रालयों में
न्यायालयों में,
धर्मालयों में
चपालों में
दिलो- दिमाग पर छायी
हैं
ये मजेदार कुर्सियां
ऊंची कुर्सियां, घूमनेवाली
कुर्सियां.....
RAMESH YADAV
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